आकाशगंगा टाईम्स/सिरमौर
पांवटा साहिब के शिक्षा जगत के लिए 31 मार्च 2026 का दिन भावुक और यादगार बन गया, जब केंद्रीय मुख्य शिक्षक मामचंद ने 39 वर्ष 7 माह की निष्कलंक, समर्पित और प्रेरणादायक सेवा के बाद औपचारिक रूप से सेवानिवृत्ति ग्रहण की। वर्ष 1986 में शिक्षा विभाग में अपने सफर की शुरुआत करने वाले मामचंद ने अपने पूरे सेवाकाल में शिक्षा की ज्योति जलाने, विद्यार्थियों का भविष्य संवारने और समाज को बेहतर दिशा देने का कार्य पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ किया।
अपने लंबे कार्यकाल में उन्होंने वॉलिंटियर शिक्षक, जेबीटी, मुख्य अध्यापक और केंद्रीय मुख्य शिक्षक जैसे विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर रहकर सेवाएं दीं। हर पद पर उनका कार्यशैली अनुकरणीय रही। वे उन शिक्षकों में शामिल रहे जिन्होंने विद्यालय को केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रखा, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास, नैतिक शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी पर भी विशेष ध्यान दिया।
मामचंद ने अपने सेवाकाल के दौरान करीब 10 विद्यालयों में अपनी सेवाएं दीं, जिनमें धमौन, मीनलबाग, खारा-2, श्यामपुर, रजाइना, कंडेला, बढ़ाना, आगरों और डांडा जैसे विद्यालय प्रमुख रहे।
क्षेत्र के लोग बताते हैं कि मामचंद केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शक, अभिभावक और प्रेरणास्रोत रहे हैं। उनके पढ़ाए हुए अनेक छात्र आज विभिन्न सरकारी और निजी क्षेत्रों में उच्च पदों पर कार्यरत हैं, जो उनकी शिक्षण क्षमता और समर्पण का प्रमाण है।
सेवानिवृत्ति के अवसर पर शिक्षा विभाग, सहकर्मियों, पूर्व विद्यार्थियों और क्षेत्रवासियों ने उन्हें भावभीनी विदाई देते हुए उनके योगदान को याद किया। सभी ने उनके स्वस्थ, सुखमय और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
