Friday, March 13, 2026
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सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ करने पर दे रही विशेष बल : मुख्यमंत्री

आकाशगंगा टाईम्स/सिरमौर
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विधायकों की प्राथमिकताओं को निर्धारित करने के लिए दूसरे दिन के दूसरे एवं अंतिम सत्र में शिमला और कांगड़ा जिला के विधायकों के साथ चर्चा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य, शिक्षा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, पर्यटन, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण और डेटा स्टोरेज पर विशेष बल दे रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए अनेक क्रांतिकारी निर्णय लिए हैं। हिमाचल प्रदेश दूध तथा प्राकृतिक रूप से उगाए गए गेहूं, जौ, मक्की एवं हल्दी पर सर्वाधिक समर्थन मूल्य देने वाला देश का पहला राज्य है। इससे ग्रामीणों की आर्थिकी मजबूत होगी तथा उनके जीवन स्तर में आशातीत बदलाव आयेगा।

उन्होंने कहा कि हाल ही के एक राष्ट्रीय सर्वे में विद्यार्थियों को गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने में हिमाचल प्रदेश 16 राज्यों को पीछे छोड़ते हुए 5वें स्थान पर पहुंच गया है, जबकि वर्ष 2021 में राज्य 21वें स्थान पर था। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार लोगों को विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने के लिए चिकित्सा संस्थानों में उच्च तकनीक की मेडिकल मशीनरी उपलब्ध करवा रही है। सरकार ने चमियाणा तथा टांडा मेडिकल कॉलेज में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू कर दी है तथा शीघ्र ही सभी मेडिकल कॉलेजों में रोबोटिक सर्जरी की सुविधा मरीजों को प्रदान कर दी जाएगी।

ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हमारी सरकार ने औद्योगिक विकास के लिए राज्य में निवेशक हितैषी सुधारात्मक पहल की हैं, जिसके कारण हिमाचल प्रदेश, केन्द्र सरकार द्वारा संचालित ‘बिजनेस रिफॉर्म एक्शन प्लान-2024’ में ‘टॉप एचीवर राज्य’ बना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश डिजिटल नवाचारों में प्रगतिशील राज्य के रूप में उभर रहा है तथा सरकारी काम-काज में डिजिटाइजेशन और ई-फाइलिंग प्रणाली को बढ़ावा दिया जा रहा है। नागरिक केन्द्रित डिजिटल सेवा वितरण में उत्कृष्ट उपलब्धि के लिए हिमाचल को ‘पीपल फर्स्ट इन्टीग्रेेशन अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है।

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उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम के सहयोग से तैयार 2025 की रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश में मानव विकास सूचकांक औसत 0.78 है, जो राष्ट्रीय औसत 0.63 से अधिक है। यह इस बात का प्रमाण है कि एक पर्वतीय राज्य सीमित संसाधनों के बावजूद भी सही नीतियों और जन सहभागिता से प्रगति कर रहा है।

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मुख्यमंत्री ने विधायकों से आग्रह किया कि वह अपनी विकास योजनाओं की प्राथमिकताएं निर्धारित प्रपत्र पर शीघ्र योजना विभाग को दें ताकि उन्हें वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में शामिल किया जा सके। उन्होंने अधिकारियों को विधायकों द्वारा उठाई गई समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने विधायकों से प्रदेश सरकार द्वारा चलाए जा रहे चिट्टा मुक्त हिमाचल अभियान को सफल बनाने के लिए अपना सक्रिय सहयोग देने का आह्वान किया।

विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने एमआईएस के तहत सेब की रिकॉर्ड खरीद तथा दूध के समर्थन मूल्य में ऐतिहासिक बढ़ौतरी के लिए मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया। उन्होंने सीमा कॉलेज में बीएड की कक्षाएं शुरू करने का आग्रह किया तथा क्षेत्र में निर्माणाधीन पेयजल योजनाओं को शीघ्र पूरा करने की मांग की।

विधायक हरीश जनारथा ने शिमला शहर में सम्पर्क मार्ग बनाने व मरम्मत के लिए अलग से बजट प्रदान करने और पेयजल योजना के निर्माण में तेजी लाने का आग्रह किया। उन्होंने शिमला में अंडरग्राउंड डक्ट बनाने के काम में तेजी लाने की मांग भी की। उन्होंने शिमला शहर के सौंदर्यीकरण के लिए चलाई जा रही योजनाओं के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

विधायक रणबीर निक्का ने नूरपुर में मदर एंड चाइल्ड अस्पताल का निर्माण कार्य पूरा करने तथा सिविल अस्पताल में डॉक्टरों के पद भरने का आग्रह किया। उन्होंने कांगड़ा जिला की सीमा में अवैध खनन को रोकने के लिए पंजाब के साथ लगती सीमा के क्षेत्रों में निशानदेही करवाने की मांग की।

विधायक मलेंद्र राजन ने बरसात में बाढ़ से हुए नुकसान का मामला उठाते हुए प्रभावितों को शीघ्र मुआवजा राशि प्रदान करने की मांग की। उन्होंने बाढ़ की रोकथाम के लिए क्षेत्र में तटीयकरण का कार्य करने का आग्रह किया। उन्होंने डमटाल के राम गोपाल मंदिर की भूमि से खैर की चोरी को रोकने तथा गन्ना किसानों के लिए शूगर पॉलिसी बनाने, इंसेटिव देने और शूगर मिल बनाने की मांग की।

विधायक बिक्रम सिंह ने रक्कड़-शांतला सड़क को सीआरआईएफ में डालने की मांग की। उन्होंने कोटला बेहड़ में लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता कार्यालय भवन के निर्माण कार्य में तेजी लाने का आग्रह किया। साथ ही चनौर औद्योगिक क्षेत्र में विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ करने का अनुरोध किया।

विधायक संजय रतन ने ज्वालामुखी में हेलीपोर्ट निर्माण का मामला उठाया। उन्होंने क्षेत्र में पॉलिटेक्निक या आईटीआई खोलने, खुंडियां अस्पताल में सुविधाएं बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने ज्वालामुखी अस्पताल में बिजली-पानी की व्यवस्था के लिए राशि उपलब्ध करवानेे और निर्माणाधीन दो पुलों के निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा करने की मांग की। उन्होंने आपदा के दौरान क्षतिग्रस्त सड़कों को ठीक करने के लिए अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध करवाने का आग्रह भी किया।

विधायक विपिन सिंह परमार ने बैर खड्ड में निर्माणाधीन दो पुलों को शीघ्र पूरा करने की मांग की। उन्होंने सिविल अस्पताल भवारना, पॉलिटेनिक कॉलेज, आईटीआई रझूं के भवन निर्माण कार्य में तेजी लाने का आग्रह किया। उन्होंने क्षेत्र में कुहलों की मरम्मत करने की मांग भी की।

विधायक पवन काजल ने शिक्षा के स्तर में सुधार लाने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने क्षेत्र की कुहलों की स्थिति को सुधारने का भी अनुरोध किया।

विधायक आशीष बुटेल ने पालमपुर में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने नगर निगम क्षेत्र में पानी के बढ़े हुए बिलों का मामला भी उठाया। उन्होंने पालमपुर में राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल और लाइब्रेरी के निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग की तथा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं बढ़ाने का आग्रह किया।

विधायक किशोरी लाल ने होली-उतराला सड़क के निर्माण कार्य में तेजी लाने तथा क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और खाली पदों को भरने का आग्रह किया। साथ ही बैजनाथ एचआरटीसी डिपो के लिए नई बसों की मांग भी की।

राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया ने प्राथमिकता बैठकों में भाग लेने के लिए विधायकों का स्वागत किया और कहा कि प्रतिवर्ष इस प्रकार की बैठकों का आयोजन किया जाता है, जो हमारे सशक्त लोकतंत्र का प्रमाण है।

बैठक में कृषि मंत्री चौधरी चंद्र कुमार, आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा, एचपीटीडीसी के अध्यक्ष रघुबीर सिंह बाली, उप-मुख्य सचेतक केवल सिंह पठानिया, मुख्य सचिव संजय गुप्ता, प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार तथा विभिन्न विभागों के प्रशासनिक सचिव एवं विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।

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