आकाशगंगा टाईम्स/सोलन
प्राकृतिक आपदा के दौरान स्कूल बंद होने पर भी शिक्षकों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के सरकारी आदेश का प्रवक्ता संघ ने विरोध किया है। प्रवक्ता संघ जिला सोलन के अध्यक्ष जयलाल जलपाइक व महासचिव हेमंत कुमार ने यहां जारी बयान में कहा है कि जब प्रशासन स्वयं मानता है कि भारी बारिश से अधिकतर मार्ग अवरूद्ध हो गए हैं।
साथ ही आपदा प्रबंधन प्रदेश के लोगों को अनावश्वयक यात्रा न करने की हिदायद दे रहा है तो ऐसे वातावरण में शिक्षकों को बुलाना न केवल असंगत है बल्कि उनकी जान को भी खतरे में डालने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि शिक्षक भी समाज का हिस्सा है। आपदा की घड़ी में उनका दायित्व भी परिवार, समाज, पड़ोस की सुरक्षा व सहयोग सुनिश्चित करना भी है। ऐसे आदेश शिक्षकों की संवेदनशीलता, उनकी मानवीय परिस्थितियों की अनदेखी है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में सोशल मीडिया के माध्यम से ऐसी भयानक तस्वीरें देखने को मिल रही है कि शिक्षक अपनी जान पर खेल कर सड़कें, नदी नाले पार करके स्कूल पहुंच रहे हैं। जब मार्ग उफनते हुए, नदी नाले, स्कूल, भवन छात्रों के लिए असुरक्षित हो गए हैं तो शिक्षकों के लिए कैसे सुरक्षित हो सकते हैं।
प्रदेश में हजारों विद्यालय ऐसी जगह हैं, जहां न केवल सड़क, न बाजार, न स्वास्थ्य सेवाएं हैं। हजारों स्कूल ऐसी लोकेशन पर है जहां मौसम की प्रतिकूलता के पहुंचना मुश्किल हो जाता है। ऐसी परिस्थिति में शिक्षकों को केवल हाजरी लगवाने के लिए स्कूल आना इतना आवश्यक क्यों समझा जा रहा है। संघ का कहना है कि विभाग को चाहिए कि ऐसे आदेशों को तुरंत प्रभाव से निरस्त किए जाएं।