Thursday, February 5, 2026
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HPU के डॉ. मनीष कुमार जर्मनी में शोध प्रवास के लिए प्रतिष्ठित इंडो-जर्मन फेलोशिप से सम्मानित

आकाशगंगा टाईम्स/शिमला
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू), शिमला के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं संचार अभियांत्रिकी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. मनीष कुमार को भारत और जर्मनी सरकार द्वारा संयुक्त रूप से वित्तपोषित प्रसिद्ध इंडो-जर्मन पेयर्ड अर्ली करियर फेलोशिप से सम्मानित किया गया है। यह एक अत्यंत प्रतिस्पर्धी और प्रतिष्ठित फेलोशिप है, जिसे भारत के प्रमुख संस्थानों से केवल 20 वैज्ञानिकों को प्रदान किया गया है।

इस फेलोशिप के अंतर्गत डॉ. कुमार जर्मनी के फ्राउनहोफर इंस्टीट्यूट फॉर सोलर एनर्जी सिस्टम्स में दो महीने का शोध प्रवास करेंगे, जो सौर ऊर्जा अनुसंधान के क्षेत्र में जर्मनी का अग्रणी संस्थान है। इसके अंतर्गत एक जर्मन शोधकर्ता भी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला में दो महीने का प्रवास करेगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत और जर्मनी के युवा शोधकर्ताओं के बीच शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा देना है।

जर्मनी में अपने प्रवास के दौरान, डॉ. कुमार “फ्लोटिंग सोलर पीवी (फोटोवोल्टाइक)” प्रणालियों पर अनुसंधान करेंगे। उनके शोध का मुख्य ध्यान इन प्रणालियों के पर्यावरणीय प्रभावों, सामाजिक पक्षों, प्रदर्शन की विश्वसनीयता और बड़े पैमाने पर स्थापना की उपयुक्तता पर होगा। यह अध्ययन जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में फ्लोटिंग सोलर प्रौद्योगिकी के स्थायी विकास में सहायक होगा।

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अंतरराष्ट्रीय मान्यता के अतिरिक्त, डॉ. कुमार को भारत सरकार के अनुसंधान संगठन ANRF (अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन) के अंतर्गत दो प्रतिष्ठित अनुसंधान अनुदान भी प्राप्त हुए हैं। इनमें से एक है प्रधानमंत्री अर्ली रिसर्च करियर ग्रांट, जो प्रारंभिक करियर में होनहार शोधकर्ताओं को दिया जाता है। वे ANRF-PAIR योजना के अंतर्गत भी कार्य कर रहे हैं, जिसके माध्यम से वे अगली पीढ़ी की सौर पीवी प्रणालियों पर अनुसंधान कर रहे हैं।

डॉ. कुमार की विशेषज्ञता सौर एवं नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी, और विशेष रूप से फ्लोटिंग सोलर सिस्टम्स की विश्वसनीयता आकलन में है। वे हिमाचल प्रदेश सरकार के बागवानी विभाग के साथ कूल क्रॉप टेक्नोलॉजीज के माध्यम से सौर ऊर्जा से चलने वाली कोल्ड स्टोरेज परियोजनाओं पर परामर्श कार्य भी कर रहे हैं, जिससे फल-सब्जियों की भंडारण और प्रसंस्करण की सुविधा बेहतर हो रही है।

डॉ. कुमार ने कई अंतरराष्ट्रीय शोध पत्र प्रतिष्ठित जर्नलों में प्रकाशित किए हैं और ‘फ्रंटियर्स इन एनर्जी रिसर्च’ पत्रिका में समीक्षक संपादक (Review Editor) के रूप में कार्य कर रहे हैं। वे Nature Sustainability, IEEE Journal of Photovoltaics, Solar Energy, और Renewable & Sustainable Energy Reviews जैसी प्रसिद्ध शोध पत्रिकाओं के समीक्षक भी हैं।

एचपीयू में शामिल होने से पूर्व, डॉ. कुमार नॉर्वे के इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी टेक्नोलॉजी (IFE), में वैज्ञानिक और आईआईटी बॉम्बे में पोस्टडॉक्टरल फेलो रह चुके हैं। उन्होंने आईआईटी रुड़की से पीएच.डी. वर्ष 2019 में पूरी की।

डॉ. कुमार को अब तक कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप एवं छात्रवृत्तियाँ प्राप्त हुई हैं, जिनमें ताइवान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय, यूरोपीय संघ, भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, और हिमाचल प्रदेश सरकार शामिल हैं। उन्होंने अब तक संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, चीन, ताइवान, इटली, नॉर्वे, स्वीडन, पोलैंड, नीदरलैंड्स, स्पेन, चेक गणराज्य सहित कई देशों की अकादमिक यात्राएँ की हैं।

उनकी यह उपलब्धियाँ न केवल वैज्ञानिक शोध में उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं, बल्कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती पहचान को भी रेखांकित करती हैं।

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